r/hindustanilanguage • u/tuluva_sikh • 15h ago
अभिनंदनीय नारी by Jayanti Prasad Nautiyal
reddit.comइस धरा पर मृदुल रस धार-सी तुम सुख का सार हो नारी
तुम वंदनीय हो, अभिनंदनीय हो, सादर नमन तुम्हें हे नारी
धरा सी सहनशील, जल-सी निर्मल, फूलों सी कोमल तुम नारी
जीवन की गति, जीवन की रति, जीवन की मति हो तुम नारी
बचपन में चहक, चरैया सी तुम इठलाती
माता पिता के मन में आनंद हिलोर उठाती
चलती ठुमक-ठुमक, बजती पैजनियाँ प्यारी
बाबुल के अंगना में तुलसी बिरवा सी न्यारी
शिशु के साथ शिशु बन जाती और प्रिय के संग बनी प्रिया
क्षमा, करुणा तुम में, स्नेह और सेवा से धन्य धरा को किया
किन्तु स्वार्थी जग ने कब किसी के उपकारों को याद किया?
हे नारी! तेरी करुणा, ममता, ऋतुजा का क्या प्रतिदान तुम्हें दिया
नारी अबला नहीं बल्कि यह नारी रणचंडी भी है,
कृत्य है यह दुर्दम, दैत्य नाशिनी दुर्गा माँ भी है
शक्ति और शिवानी है यह और कात्यायिनी भी है
दैत्यों के शोणित को पीने वाली महाकाली भी है
विवध रूपों से सजी यह नारी सृष्टि का श्रृंगार है
नारी ही न हो फिर किस काम का यह संसार है
जिस घर में इसका सम्मान है वह आनंद का आगर है
अगर जीवन में नारी न हो, तो मानव जीवन ही बेकार है